June 8, 2026
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रामगढ़:शारदीय नवरात्र आज से होंगे शुभारंभ… – Vananchal 24TV Live – वनांचल 24TV लाइव

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रामगढ़:इन्द्रजीत कुमार

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पूरे भारत में नवरात्रि का त्योहार बेहद ही कई मायनों में खास माना जाता हैं। नवरात्रि के नौ दिनों में माता के 9 रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। इसी बार शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 15 अक्टूबर 2023 से होने जा रही हैं। समापन 24 अक्टूबर 2023 को होगा। सनातन हिंदू पंचांग के अनुसार अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होती हैं।

नवरात्रि साल में 4 बार पड़ती हैं। माघ, चैत्र, आषाढ़ और आश्विन। आश्विन की नवरात्रि को शारदीय नवरात्रि के नाम से जाना जाता हैं। नवरात्रि के वातावरण से तमस का अंत होता हैं। नकारात्मक माहौल की समाप्ति होती हैं। शारदीय नवरात्रि से मन में उमंग और उल्लास की वृद्धि होती हैं। दुनिया में सारी शक्ति नारी या स्त्री स्वरूप के पास ही हैं। इसलिए नवरात्रि में देवी की उपासना ही की जाती हैं। देवी शक्ति का एक स्वरूप कहलाती हैं। इसे शक्ति नवरात्रि भी कहा जाता हैं।


नवरात्रि के नौ दिनों में देवी के अलग अलग स्वरूपों की पूजा की जाती हैं। जिसे नवदुर्गा का स्वरूप कहा जाता हैं। हर स्वरूप से विशेष तरह का आशीर्वाद औंर वरदान प्राप्त होता हैं। इसके साथ ही साथ आपके ग्रहों की दिक्कतों का समापन भी होता हैं। इस बार शारदीय नवरात्रि 15 अक्टूबर से आरंभ होने जा रही हैं। समापन 24 अक्टूबर को होगा। दसवें दिन दशहरा मनाया जाता हैं।

शारदीय नवरात्र की तारीख और शुभ मुहूर्त:-

इस वर्ष के शारदीय नवरात्रि 15 अक्टूबर 2023 रविवार से शुरू होने जा रहे हैं। नवरात्रि की अष्टमी 22 अक्टूबर 2023 को और नवमी 23 अक्टूबर 2023 को मनाई जाएगी। इसी नौ दिन के उत्सव का समापन 24 अक्टूबर2023 यानी दशहरे के दिन होगा। शारदीय नवरात्रि सबसे बड़ी नवरात्रि में से मानी जाती है। शारदीय नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना की जाती हैं। जिसका एक मुहूर्त होता हैं।

सनातन हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन माह की प्रतिपदा तिथि 14 अक्टूबर को रात 11 बजकर 24 मिनट पर शुरू होगी। प्रतिपदा तिथि का समापन 15 अक्टूबर 2023 को रात 12 बजकर 32 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार, शारदीय नवरात्रि इस बार 15 अक्टूबर 2023 को ही मनाई जाएगी।

नवरात्र पर कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त:-

पंचांग के अनुसार शारदीय नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि को यानी पहले दिन कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 15 अक्टूबर 2023 को सुबह 11 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 36 मिनट तक रहेगा। ऐसे में कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त इस साल 48 मिनट ही रहेगा।

घटस्थापना तिथि रविवार 15 अक्टूबर 2023

घटस्थापना का अभिजीत मुहूर्त – सुबह 11:48 मिनट से दोपहर 12:36 मिनट तक

शारदीय नवरात्र की तिथियां:-

15 अक्टूबर 2023 मां शैलपुत्री (पहला दिन) प्रतिपदा तिथि
16 अक्टूबर 2023 मां ब्रह्मचारिणी (दूसरा दिन) द्वितीया तिथि
17 अक्टूबर 2023 मां चंद्रघंटा (तीसरा दिन) तृतीया तिथि
18 अक्टूबर 2023 मां कुष्मांडा (चौथा दिन) चतुर्थी तिथि
19 अक्टूबर 2023 मां स्कंदमाता (पांचवा दिन) पंचमी तिथि
20 अक्टूबर 2023 मां कात्यायनी (छठा दिन) षष्ठी तिथि
21 अक्टूबर 2023 मां कालरात्रि (सातवां दिन) सप्तमी तिथि
22 अक्टूबर 2023 मां महागौरी (आठवां दिन) दुर्गा अष्टमी
23 अक्टूबर 2023 महानवमी, (नौवां दिन) शरद नवरात्र व्रत पारण
24 अक्टूबर 2023 मां दुर्गा प्रतिमा विसर्जन, दशमी तिथि (दशहरा)

इस बार मां दुर्गा की क्या हैं सवारी?

इस वर्ष मां हाथी पर सवार होकर आ रही हैं। ऐसे में इस बात के प्रबल संकेत मिल रहे हैं कि इससे सर्वत्र सुख संपन्नता बढ़ेगी। इसके साथ ही देश भर में शांति के लिए किए जा रहे प्रयासों में सफलता मिलेगी। पूरे भारत देशभर के लिए यह नवरात्रि शुभ साबित होने वाली हैं।

घटस्थापना या कलशस्थापना के लिए आवश्यक सामग्री:-

सप्त धान्य (7 तरह के अनाज), मिट्टी का एक बर्तन, मिट्टी, कलश, गंगाजल (उपलब्ध न हो तो सादा जल), पत्ते (आम या अशोक के), सुपारी, जटा वाला नारियल, अक्षत, लाल वस्त्र, पुष्प।

शारदीय नवरात्र में घटस्थापना की विधि:-

नवरात्रि के पहले दिन व्रती द्वारा व्रत का संकल्प लिया जाता हैं। इस दिन लोग अपने सामर्थ्य अनुसार 2, 3 या पूरे 9 दिन का उपवास रखने का संकल्प लेते हैं। संकल्प लेने के बाद मिट्टी की वेदी में जौ बोया जाता है और इस वेदी को कलश पर स्थापित किया जाता हैं। सनातन हिन्दू धर्म में किसी भी मांगलिक काम से पहले भगवान गणेश की पूजा का विधान बताया गया। कलश को भगवान गणेश का रूप माना जाता हैं। इसी परंपरा का निर्वाह किया जाता हैं। कलश को गंगाजल से साफ की गई जगह पर रख दें।

इसके बाद देवी-देवताओं का आवाहन करें। कलश में सात तरह के अनाज, कुछ सिक्के और मिट्टी भी रखकर कलश को पांच तरह के पत्तों से सजा लें। इस कलश पर कुल देवी की तस्वीर स्थापित करें। दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। इसी दौरान अखंड ज्योति अवश्य प्रज्वलित करें। अंत में देवी मां की आरती करें और प्रसाद को सभी लोगों में बाट दें।

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