October 8, 2026
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हम गढ़ते हैं मिट्टी से अपनी तकदीर के साथ आपके चाहतों की तस्वीर; निवेदन है दीपावली के पावन पर्व पर जलाएं मिट्टी के दीये… – Vananchal 24TV Live – वनांचल 24TV लाइव

हम गढ़ते हैं मिट्टी से अपनी तकदीर के साथ आपके चाहतों की तस्वीर; निवेदन है दीपावली के पावन पर्व पर जलाएं मिट्टी के दीये… – Vananchal 24TV Live – वनांचल 24TV लाइव
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दीपावली पर दीयों की मांग को लेकर रेस हुआ कुम्हारों के चाक का पहिया; बाजार में छाए महंगाई के बादलों के बीच भी अच्छे रोजगार की है उम्मीद…

सरायकेला:संजय मिश्रा

सरायकेला: आधुनिकता के इस दौर में चकाचौंध कर देने वाली सीरीज लाईट के बीच मिट्टी के दियों का अपना एक अलग ही महत्व है. प्रकाश का पर्व दीपावली में चाहे जितना भी सीरीज लाईट का डेकोरेशन कर लें किंतु मिट्टी के दिए जलाए बिना यह पर्व पूरा नहीं होता है. आधुनिक लाइटों के बीच मिट्टी के दीये जलाने की परंपरा रही है.

दीपावली आने में अब कुछ दिन ही शेष हैं. दीपावली पर्व को देखते हुए कुम्हार समाज के चाक के पहिए अब रेस हो चले हैं। मिट्टी से अपने लिए सपने और खरीददारों के लिए आकार गढ़ने वाले कुमार समाज के लोग मिट्टी के दीये, खिलौने, मटकी, कलश और मूर्तियां बनाने में लग गए हैं. इसके साथ ही मिट्टी तैयार करना और तैयार सामग्रियों के लिए भट्टी सुलगाना जैसे कार्य युद्ध स्तर पर जारी हैं।

 दीपावली को लेकर कुम्हार समाज में काफी उत्साह है:-
प्रकाश का पर्व दीपावली को लेकर सरायकेला का कुम्हार समाज काफी उत्साहित है. बताया जा रहा है कि बढ़ती महंगाई के बीच भी स्वदेशी के बढ़ते क्रेज के कारण इस बार की दीपावली में अच्छी कमाई होने की उम्मीद है. सरायकेला नगर क्षेत्र के थाना चौक, हंसाऊडी, देउरीडीह जेल रोड सहित आस पास के गांव के कुम्हार समाज के लोग दीपावली को तैयारियों में जुट गए हैं. उनका मानना है कि दीपावली में अभी कुछ समय बाकी है। पहले से सभी तैयारियां कर लेने पर मौसम की अनुकूलता को देखते हुए भट्टी तैयार किया जा रहा है.

800 से 1000 रुपए प्रति ट्रैक्टर के हिसाब से खरीदी जाती है मिट्टी:-
मिट्टी के बर्तन आदि बनाने के लिए कुम्हार लोग मिट्टी खरीद कर मंगाते है. जिसके लिए उन्हें प्रति ट्रेक्टर 800 रुपए देना पड़ता है. मिट्टी के बरतन बनाने के लिए सरायकेला के कुम्हार को तीन जगहों से मिट्टी मंगवानी पड़ती है. जिसके तहत दीये और छोटे सामान बनाने के लिए पांड्रा गांव से, कढ़ाई और बड़े खिलौने बनाने के लिए कुदरसाई से तथा दोनों मिट्टी में मिलाने के लिए पाटाहेसल से चीटा मिट्टी मंगाई जाती है.

चाक से कुम्हार राकेश प्रजापति की मार्मिक अपील:-
सरायकेला के प्रगतिशील युवा कुम्हार राकेश प्रजापति बताते हैं कि मिट्टी तैयार कर और चाक चला कर मिट्टी के समान की आकृति गढ़ना और फिर उसे पकाते हुए रंग का तैयार करना एक बेहद ही मेहनतकश और समय लगने वाला कार्य है। जिसमें दीपावली के लिए दीप हो या अन्य सामग्री तैयार करने में लगभग 1 सप्ताह का समय लग जाता है। इसके लिए उचित मिट्टी का चुनाव, जलावन के लिए लकड़ी और रंगने के लिए रंग महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा है कि कुम्हारों को अपने रोजगार के लिए साल में दीपावली महत्वपूर्ण सीजन के तौर पर आता है। इस वर्ष महंगाई के बाजार में मिट्टी खरीदने से लेकर जलावन के लिए लकड़ी और रंग के महंगे होने के बावजूद भी दीपावली बाजार में मिट्टी से बने दीयों और अन्य सामग्रियों की मांग को लेकर अच्छे रोजगार की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि एक कुम्हार चाक चला कर अपने परिवार के लिए उम्मीद और खरीदारों के लिए उनकी चाहत को गढ़ने का काम करता है। उन्होंने अपील की है कि परंपरा और संस्कारों का निर्वाह करते हुए सभी जन इस दीपावली अपने-अपने घरों में मिट्टी के दीप जलाएं। ताकि पूजा संस्कार के साथ साथ कुम्हार परिवारों के उम्मीदों को भी इस वर्ष खुशहाली मिल सके।

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