June 8, 2026
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नवयौवन रूप में महाप्रभु श्री जगन्नाथ के दर्शन के लिए तैयार हो रहा है उनका राजमुकुट; परंपरा के अनुसार शिवरंजन मालाकार बना रहे हैं महाप्रभु सहित माता सुभद्रा और अग्रज बलभद्र के लिए मुकुट . . . – Vananchal 24TV Live – वनांचल 24TV लाइव

नवयौवन रूप में महाप्रभु श्री जगन्नाथ के दर्शन के लिए तैयार हो रहा है उनका राजमुकुट; परंपरा के अनुसार शिवरंजन मालाकार बना रहे हैं महाप्रभु सहित माता सुभद्रा और अग्रज बलभद्र के लिए मुकुट . . . – Vananchal 24TV Live – वनांचल 24TV लाइव
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अलौकिक परंपरा: एकमात्र माली परिवार ही बनाते हैं महाप्रभु श्री जगन्नाथ का राजमुकुट; लाते हैं फूल भी।

  • सरायकेला : SANJAY 

जगत के नाथ महाप्रभु श्री जगन्नाथ कलियुग में जीवंत देव के रूप में पूजे जाने वाले देव हैं। जगन्नाथ संस्कार और संस्कृति के विषय में मान्यता रही है कि महाप्रभु के सभी धार्मिक अनुष्ठान जीवन से जुड़े हुए हैं। जिसमें देवस्नान पूर्णिमा पर बीते 4 जून को शाही औषधीय सहस्त्रस्नान के पश्चात चढ़ावे की भोग प्रसाद में खीर खिचड़ी के साथ खट्टे आमड़े की सब्जी का सेवन कर महाप्रभु ज्वर से पीड़ित होकर बीमार हो गए थे। जिसके बाद श्री मंदिर के अन्नसर गृह में स्वास्थ्य लाभ करते हुए इलाजरत हैं। यहां श्री मंदिर के पुजारी पंडित ब्रह्मानंद महापात्र द्वारा उनकी सेवा की जा रही है। और इस दौरान महाप्रभु को प्रतिदिन भोग के रूप में सिर्फ चूड़ा का सेवन कराया जा रहा है। औषधीय इलाज के परंपरानुसार माली परिवार द्वारा बीमार होने के 5 दिनों पश्चात पंचमूल औषधि तैयार कर सेवन कराया गया। और उसके 10 दिनों बाद महाप्रभु को 17 जून यानी शनिवार को दशमूल औषधि का सेवन कराया गया। जिसके पश्चात महाप्रभु श्री जगन्नाथ स्वस्थ होकर 18 जून रविवार को नेत्र उत्सव के अवसर पर नवयौवन रुप में अपने भक्तों को 15 दिनों के बाद दर्शन देंगे।

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महाप्रभु ने किया दशमूल औषधि का सेवन:-
कलियुग के जीवंत देव के रूप में पूजे जाने वाले महाप्रभु श्री जगन्नाथ अपनी अस्वस्थता के 15वें दिन शनिवार को विशेष दशमूल औषधि का सेवन किये। जिसे माली परिवार द्वारा बेहद ही शुद्ध एवं गुप्त तरीके से तैयार कर लाया जाता है। दशमूल औषधि तैयार करने के लिए मध्य रात्रि अति शुद्धता के साथ स्नान कर एक ही नए वस्त्र में नई हांडी में नए चूल्हे पर बड़ी गोपनीयता तरीके से दशमूल औषधि तैयार की जाती है। जिसे इस वर्ष माली परिवार की ज्येष्ठ महिला द्वारा महाप्रभु श्री जगन्नाथ के लिए दशमूल औषधि तैयार की गई। जिसके सेवन के पश्चात महाप्रभु स्वस्थ होकर भक्तों को 18 जून को नवयौवन रूप में दर्शन देंगे।

महाप्रभु के लिए तैयार हो रहा है राजमुकुट:-
स्वस्थ होने के पश्चात 18 जून को महाप्रभु श्री जगन्नाथ के नवयौवन रूप की सज्जा के लिए राजमुकुट तैयार हो रहा है। परंपरानुसार सरायकेला के माली परिवार के मुकुट घर में शिवरंजन मालाकार द्वारा महाप्रभु श्री जगन्नाथ सहित माता सुभद्रा और बड़े भाई बलभद्र के लिए मुकुट तैयार किया जा रहा है।

माली परिवार की 10वीं पीढ़ी सेवा कर रही है महाप्रभु श्री जगन्नाथ की:- ऐतिहासिक जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि मूल रूप से उड़ीसा आनंदपुर के रहने वाले माली परिवार को तत्कालीन सरायकेला स्टेट के शासक महाप्रभु श्री जगन्नाथ की सेवा के लिए सरायकेला लाए थे। तब से चली आ रही परंपरा के अनुसार माली परिवार ही महाप्रभु श्री जगन्नाथ के लिए फूल लाते हैं। जिसमें महाप्रभु श्री जगन्नाथ के लिए तुलसी, माता सुभद्रा के लिए लाल और सादा फूल तथा बड़े भाई बलभद्र के लिए लाया गया बेलपत्र का ही चढ़ावा चढ़ाया जाता है। इसके अलावा महाप्रभु के अस्वस्थता के दौरान माली परिवार द्वारा तैयार की गई औषधि के सेवन कराए जाने की परंपरा है। साथ ही महाप्रभु सहित बहन सुभद्रा माता और बड़े भाई बलभद्र के लिए मुकुट भी माली परिवार द्वारा ही तैयार किया जाता है। सरायकेला के माली परिवार द्वारा तैयार किए गए मुकुट क्षेत्र अंतर्गत आयोजित होने वाले सभी रथ उत्सव में उपयोग किए जाते हैं।

महाप्रभु 20 जून को करेंगे रथयात्रा:-
18 जून रविवार को नेत्र उत्सव के पश्चात उत्कल पांजी पंचागीय दशा के अनुसार 19 जून सोमवार को उभा यात्रा का आयोजन किया जाएगा। 20 जून सोमवार को महाप्रभु श्री जगन्नाथ अपनी बहन सुभद्रा और बड़े भाई बलभद्र के साथ वार्षिक रथयात्रा के लिए श्री मंदिर से प्रस्थान करेंगे। रथयात्रा के सभी धार्मिक अनुष्ठानों को लेकर जगन्नाथ सेवा समिति सरायकेला द्वारा तैयारियां की जा रही हैं।

जाने जगन्नाथ संस्कृति को:-
1. ईश्वर होते हुए भी आम जीवन से जुड़े घटनाओं का धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।
2. कलियुग में टूट रहे रिश्ते नाते को जोड़ने का संदेश देते हुए महाप्रभु अपने बड़े भाई और बहन के साथ होते हैं। और रथ यात्रा करते हैं।
3. एकमात्र देव जो अपने भक्तों से मिलने के लिए साल में एक बार रथ यात्रा कर श्री मंदिर के बाहर भक्तों के बीच पहुंचते हैं।

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